अमलतास अस्पताल में सरजू बाई का नेत्रदान, पति ने भी लिया महादान का संकल्प

देवास – मानवता की सेवा और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में देवास का अमलतास मेडिकल कॉलेज एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बना है। कनासिया, उज्जैन की निवासी श्रीमती सरजू बाई पलसावादिया के मरणोपरांत उनके संकल्प के अनुसार अमलतास अस्पताल में उनका नेत्रदान संपन्न हुआ। समाज के लिए प्रेरणा बने इस पुनीत कार्य के लिए अमलतास हॉस्पिटल प्रबंधन द्वारा दिवंगत सरजू बाई के परिवार को आभार प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस भावुक और सम्मानजनक क्षण में दिवंगत सरजू बाई के पति श्री रामचंद्र जी पलसावादिया ने भी अमलतास अस्पताल में भविष्य में नेत्रदान करने का संकल्प लिया। इस दौरान उनके सुपुत्र ओमप्रकाश और प्रदीप भी उपस्थित रहे, जिन्होंने माता के संकल्प को पूरा करने में पूरा सहयोग दिया।

अमलतास के सुप्रसिद्ध नेत्र रोग विभाग के विशेषज्ञ द्वारा बताया गया की “स्वर्गीय सरजू बाई जी द्वारा किया गया नेत्रदान मानवता के प्रति एक प्रेरणादायक योगदान है। उनके इस महान निर्णय से किसी जरुरतमंद दो व्यक्तियों के जीवन में रोशनी आ सकेगी। क्योंकि मृत्यु के बाद भी किसी की आँखों से दुनिया को देखा जा सकता है नेत्रदान, अंगदान और देहदान करने से आप मृत्यु के बाद भी अमर हो जाते हैं।

नेत्रदान की इस पूरी प्रक्रिया को अमलतास अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शिशिर उर्ध्ववर्षी, डॉ. मोहम्मद वकास खान और अमलतास आई बैंक के इंचार्ज मोहम्मद रिहान एवं उनकी टीम ने संवेदनशीलता के साथ सफलता पूर्वक संपन्न कराया।

इस पुनीत कार्य पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए अमलतास ग्रुप के चेयरमैन श्री मयंकराज सिंह भदौरिया ने कहा “श्रीमती सरजू बाई पलसावादिया जी और उनके पूरे परिवार का यह निर्णय मानवता की सेवा का एक अनुकरणीय उदाहरण है। किसी को दृष्टि का उपहार देना दुनिया के सबसे बड़े पुण्यों में से एक है। अमलतास संस्थान इस महादान के लिए परिवार के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता है। दुख की इस घड़ी में परिवार द्वारा लिया गया यह संकल्प समाज में अंगदान और नेत्रदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।”

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मानवता की सेवा और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में आज देवास का अमलतास मेडिकल कॉलेज एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बना। सेवाधाम आश्रम (अंकितग्राम) में